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इस अनुवाद को अभी किसी डॉक्टर ने नहीं जाँचा है। अर्थ सही होना चाहिए, लेकिन अगर कुछ अस्पष्ट या ग़लत लगे तो अंग्रेज़ी मूल पढ़ें।
अंग्रेज़ी में मूल पढ़ेंटीबी या तपेदिक (Tuberculosis) एक बैक्टीरिया का संक्रमण है जो अक्सर फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह हवा के ज़रिए तब फैलता है जब फेफड़ों की टीबी से पीड़ित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है, और पूरा इलाज कराने पर यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।
संक्षेप में
टीबी मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नाम के बैक्टीरिया से होता है। यह आमतौर पर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह लिम्फ नोड्स (lymph nodes), रीढ़ की हड्डी, दिमाग, पेट और शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
संक्रमित कई लोग कभी बीमार नहीं पड़ते। बैक्टीरिया शरीर में निष्क्रिय (inactive) रहते हैं — इसे लेटेंट टीबी (latent TB) कहा जाता है, और यह दूसरों में नहीं फैलता। कुछ लोगों में यह बाद में सक्रिय हो जाता है, खासकर अगर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) कम हो जाए।
दुनिया भर के टीबी के मामलों में भारत का एक बड़ा हिस्सा है। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme) के तहत सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और इलाज मुफ्त है।
टीबी का इलाज संभव है और यह पूरी तरह ठीक हो सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि दवाई का पूरा कोर्स खत्म किया जाए, भले ही आप बेहतर महसूस करने लगें।
लक्षण
- दो हफ्ते से ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी
- खांसी में खून या खून से सना बलगम आना
- छाती में दर्द, या सांस लेते और खांसते समय दर्द होना
- बुखार आना, जो अक्सर शाम के समय बढ़ जाता है
- रात में पसीना आना
- बिना किसी कोशिश के वजन कम होना
- भूख न लगना
- लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
- फेफड़ों के बाहर टीबी होने पर प्रभावित अंग के हिसाब से अलग-अलग लक्षण दिखते हैं — जैसे गर्दन में बिना दर्द वाली सूजन, या लंबे समय से पीठ दर्द रहना
कारण क्या है
- मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) बैक्टीरिया का संक्रमण
- हवा के ज़रिए फैलना, जब सक्रिय फेफड़ों की टीबी वाला व्यक्ति खांसता, छींकता, बोलता या गाता है
- यह खाना बांटकर खाने, हाथ मिलाने या किसी सतह को छूने से नहीं फैलता है
किन्हें ज़्यादा ख़तरा है
- सक्रिय टीबी वाले व्यक्ति के साथ रहना या करीब से काम करना
- एचआईवी (HIV) संक्रमण, या कोई भी ऐसी बीमारी या दवा जो रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) को कम करती है
- डायबिटीज (Diabetes - मधुमेह)
- कुपोषण (Undernutrition)
- धूम्रपान करना और बहुत ज्यादा शराब पीना
- भीड़भाड़ वाली या जहां हवा का सही बहाव (ventilation) न हो, ऐसी जगह रहना
- सिलिकोसिस (Silicosis) और काम से जुड़ी फेफड़ों की अन्य बीमारियां
जाँच और पहचान
- बलगम की जांच (Sputum examination) — इसमें खांसकर बलगम निकाला जाता है और बैक्टीरिया की जांच की जाती है
- रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्ट जैसे कि सीबीएनएएटी (CBNAAT) या ट्रूनैट (TrueNat), जो कुछ ही घंटों में टीबी की पुष्टि करते हैं और रिफैम्पिसिन (Rifampicin) दवा के प्रति प्रतिरोध (resistance) की जांच भी करते हैं
- चेस्ट एक्स-रे (Chest X-ray)
- कल्चर और ड्रग-सेंसिटिविटी टेस्ट (Culture and drug-sensitivity testing), जिससे पता चलता है कि कौन सी दवाएं ठीक से काम करेंगी
- फेफड़ों के बाहर की टीबी के लिए, प्रभावित जगह से सैंपल या बायोप्सी (Biopsy) ली जाती है
- ये सभी जांचें सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में मुफ्त उपलब्ध हैं।
इलाज
- कम से कम छह महीने तक एंटी-टीबी दवाओं (anti-TB medicines) का कॉम्बिनेशन (एक से ज्यादा दवाएं) लेना। कई दवाएं एक साथ दी जाती हैं क्योंकि सिर्फ एक दवा लेने से बैक्टीरिया उस दवा के असर को बेअसर (resistant) कर देते हैं।
- भारत के राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme) के तहत इलाज मुफ्त है, और इसमें नियमित जांच और निगरानी शामिल है।
- आमतौर पर लोग कुछ हफ्तों के भीतर बेहतर महसूस करने लगते हैं — लेकिन इस समय दवा बंद कर देना ही टीबी के ड्रग-रेजिस्टेंट (drug-resistant) बनने का मुख्य कारण है। दवा का पूरा कोर्स खत्म करें।
- ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी (Drug-resistant TB) के लिए विशेषज्ञ की देखरेख में अलग और लंबा इलाज कराने की जरूरत होती है।
- निक्षय पोषण योजना (Ni-kshay Poshan Yojana) के माध्यम से पोषण संबंधी सहायता दी जाती है, जो टीबी का इलाज करा रहे लोगों को सीधे वित्तीय मदद प्रदान करती है।
बचाव
- यदि दो हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी है तो बलगम की जांच करवाएं — शुरुआत में ही बीमारी का पता चलने से इसे आगे फैलने से रोका जा सकता है
- खांसते या छींकते समय अपना मुंह और नाक ढकें, और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को सुरक्षित तरीके से फेंकें
- कमरों में हवा का सही बहाव (ventilation) रखें और धूप आने दें
- जन्म के समय बीसीजी टीका (BCG vaccine) लगवाना, जो शिशुओं को टीबी के गंभीर रूपों से बचाता है
- टीबी के मरीज के घर के अन्य सदस्यों की जांच की जानी चाहिए और उन्हें बचाव का इलाज दिया जा सकता है
- डायबिटीज, पोषण और एचआईवी (HIV) का अच्छे से ध्यान रखें, क्योंकि ये टीबी के खतरे को प्रभावित करते हैं
डॉक्टर को कब दिखाएँ?
अगर आपको दो हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी है, खासकर शाम को बुखार आने, रात में पसीना आने या वजन कम होने के साथ, तो डॉक्टर को दिखाएं। अगर खांसी में खून आए तो तुरंत जाएं। किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच और इलाज मुफ्त है — आपको पहले इंतजार करने या प्राइवेट डॉक्टर को फीस देने की जरूरत नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुझे टीबी की जांच कराने से पहले कितने समय तक खांसी रहने का इंतजार करना चाहिए?
दो हफ्ते से ज्यादा। इससे ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी — खासकर शाम के बुखार, रात में पसीना आने या वजन घटने के साथ — की बलगम टेस्ट से जांच करानी चाहिए, जो सरकारी केंद्रों पर मुफ्त है।
क्या भारत में टीबी का इलाज वाकई मुफ्त है?
हां। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme) के तहत सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में जांच, दवाएं और बाद की देखभाल मुफ्त दी जाती है। इलाज कराने वाले लोगों को निक्षय पोषण योजना (Ni-kshay Poshan Yojana) के तहत पोषण संबंधी सहायता भी मिलती है।
क्या टीबी पूरी तरह से ठीक हो सकती है?
हां। जब दवा का पूरा कोर्स किया जाता है तो टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है। इलाज बीच में छोड़ना ही इसके ड्रग-रेजिस्टेंट (drug-resistant) रूप में वापस आने का मुख्य कारण है, जिसका इलाज काफी मुश्किल होता है।
क्या टीबी से पीड़ित व्यक्ति से उनके परिवार को भी संक्रमण हो सकता है?
सक्रिय फेफड़ों की टीबी वाला व्यक्ति इलाज शुरू होने से पहले और इलाज के पहले कुछ हफ्तों में इसे हवा के जरिए फैला सकता है। असरदार इलाज शुरू होने के बाद संक्रमण फैलने का खतरा तेजी से कम हो जाता है। घर के सदस्यों की जांच होनी चाहिए, और घर में ताजी हवा और धूप का आना काफी मददगार होता है।